लक्ष्मी माँ से विनम्र निवेदन
चली आओ मेरी माता आई फिर से दिवाली है,
बिना तेरे तो लक्ष्मी माँ दिवाली होत काली है।
बड़ी उलझन करे हम क्या न कोई बात बनती है,
किया जिसने कर्म हम पे चवन्नी ही उछाली है।
दिया हमने दिलाशा भी मगर बच्चें नही माने,
खड़ी घेरे मुझे पलटन मेरी तो जां निकाली है।
लड़ाई की है बीवी ने अंगूठी लेन के खातिर,
करू मैं क्या कहां जाऊ सभी की जेब खाली है।
सुनो रैना"की विनती माँ गरीबों के यहां आओ,
अमीरों के यहां हर रोज ही होती दिवाली है। रैना"
चली आओ मेरी माता आई फिर से दिवाली है,
बिना तेरे तो लक्ष्मी माँ दिवाली होत काली है।
बड़ी उलझन करे हम क्या न कोई बात बनती है,
किया जिसने कर्म हम पे चवन्नी ही उछाली है।
दिया हमने दिलाशा भी मगर बच्चें नही माने,
खड़ी घेरे मुझे पलटन मेरी तो जां निकाली है।
लड़ाई की है बीवी ने अंगूठी लेन के खातिर,
करू मैं क्या कहां जाऊ सभी की जेब खाली है।
सुनो रैना"की विनती माँ गरीबों के यहां आओ,
अमीरों के यहां हर रोज ही होती दिवाली है। रैना"
No comments:
Post a Comment