चिरागां जब जले मन में तभी होता उजाला है,
बिना रोशन हुये मन के अंधेरा स्याह काला है।
अभी तो खूब फुरसत है चढ़ी मस्ती दिवाना मन,
ढ़ले जब शाम मुश्किल हो पड़े गैरों से पाला है।
नही तुझको खबर कोई गुमां करता बता किसका,
जरा तू खोल ले उसको लगा जो मन पे ताला है।
रहे है साथ में हरपल लिखे करनी तेरी कथनी,
नही की मेहनत तूने नसीबों को उछाला है।
चढ़े रंग नाम का मन पे तभी महके चमन तेरा,
मिले रैना" नसीबों से हसीं जामे नाम प्याला है।
बिना रोशन हुये मन के अंधेरा स्याह काला है।
अभी तो खूब फुरसत है चढ़ी मस्ती दिवाना मन,
ढ़ले जब शाम मुश्किल हो पड़े गैरों से पाला है।
नही तुझको खबर कोई गुमां करता बता किसका,
जरा तू खोल ले उसको लगा जो मन पे ताला है।
रहे है साथ में हरपल लिखे करनी तेरी कथनी,
नही की मेहनत तूने नसीबों को उछाला है।
चढ़े रंग नाम का मन पे तभी महके चमन तेरा,
मिले रैना" नसीबों से हसीं जामे नाम प्याला है।
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