Sunday, December 6, 2015




सफ़ीना टूट कर बिखरा किनारा मिल नही सकता,
किसे हम हमसफर कह दे सहारा मिल नही सकता।
बड़ा मुश्किल हुआ जीना नही कोई भरोसा है,
करे जो बात दम वाली वो प्यारा मिल नही सकता।
रहे बेताब दिल मेरा किसी की याद आती है,
कभी जो यार अपना था हमारा मिल नही सकता।
खड़े तैनात सीमा पर जवानों की बड़ी हिम्मत,
बिना उनके हमें हरगिज नजारा मिल नही सकता।
वफ़ा की बात जब चलती ज़िकर तेरा सभी करते,
बिना तेरे अंधेरे में उजारा मिल नही सकता।
नसीबा भी परेशां है भला अब खोल दरवाजें,
कहीं डूबे बिना तेरे शिकारा मिल नही सकता। रैना"


                                     राजेन्द्र शर्मा "रैना"
                                      बराड़ा (अम्बाला )
                                     94160 76914


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