यूं लोग तो हमें हरदम मिलते है,
अपने मिजाज से पर कम मिलते हैं।
हालात ही बुरे अब तो दुनिया के,
कुछ फासला रखे से हम मिलते हैं।
हैं पूछते परेशां हैरां आशिक,
क्यों इश्क में सदा ही गम मिलते हैं।
मिलती ख़ुशी नसीबा जिनके अच्छे,
यूं बदनसीब नैना नम मिलते है।
ये दिल भला बचे कैसे बिन उलझे,
जब जुल्फ में बड़े ही खम मिलते हैं।
रैना"मरे भला क्यों किसके खातिर,
अब लोग इस शहर के बेदम मिलते हैं। रैना"
अपने मिजाज से पर कम मिलते हैं।
हालात ही बुरे अब तो दुनिया के,
कुछ फासला रखे से हम मिलते हैं।
हैं पूछते परेशां हैरां आशिक,
क्यों इश्क में सदा ही गम मिलते हैं।
मिलती ख़ुशी नसीबा जिनके अच्छे,
यूं बदनसीब नैना नम मिलते है।
ये दिल भला बचे कैसे बिन उलझे,
जब जुल्फ में बड़े ही खम मिलते हैं।
रैना"मरे भला क्यों किसके खातिर,
अब लोग इस शहर के बेदम मिलते हैं। रैना"
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