दोस्तों के लिए कुछ खास
बैठ तन्हा सोचना क्यों किसलिये आना हुआ,
जो मुसाफिर जा रहे हैं किस शहर जाना हुआ।
जिन्दगी तुझको मिली है क्यों भला ये किसलिये,
जान कर अनजान बनता खुद से बेगाना हुआ।
होश अपनी खो गया है देख दुनिया की चमक,
दुःख तुझे जो दे रहे तू उसका दीवाना हुआ।
तेरे हिस्से में अंधेरे ही रहेंगे जान ले,
मतलबी है वो शमा तू जिसका परवाना हुआ।
दूर तक तू देख ले काली अंधेरी रात है,
रिन्द मस्ती में रहे प्यारा तो मयखाना हुआ।
आज के इस दौर में उसकी पतंग ऊँची चढ़ी,
हैं फरेबी जो बड़ा शैतान हो माना हुआ।
रैन रैना"होने लगी कुछ तो चिंता कर ले अभी,
जान मुश्किल में पड़ेगी जब वहां जाना हुआ। रैना"
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