Saturday, December 12, 2015

इस दिल को बेकरार किसी ने नहीं किया ⛳
बहर����������

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जीवन को खुश बहार किसी ने नही किया,
क्यों खुद से इश्क प्यार किसी ने नही किया।
दावा करे तमाम मुलाकात उस से की,
दीदार सच में यार किसी ने नही किया।
बेशक उसे हमेश लगन चाह सी रही,
अफ़सोस इन्तजार किसी ने नही किया।
है झूठ पसंद लोग मुहब्बत करे नही,
आबाद वो संसार किसी ने नही किया।
कब शाम हो हसीन किसी को खबर नही,
दिल इश्क का बिमार किसी ने नही किया।
है झूठ के महल बनाते सभी यहां,
भव आजतक तो पार किसी ने नही किया। रैना"




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