Tuesday, December 1, 2015


जय जय जय माँ वैष्णो जी
वैष्णो माँ मेरी सुन सदा कर्म कर,
तेरे दर का भिखारी परेशान है,
मेरे बारे कभी क्यों नही सोचती,
तेरा बच्चा यही सोच हैरान है।
तेरी रहमत हुई रात काली कटी,
ये उजाला हुआ जो मिला ज्ञान है।
जिन्दगी चल रही कुछ कमी है नही,
दीद तेरे बिना मन ये बेचैन है।
मेरी हसरत यही दूर कर दे कमी,
तू मिले गुल खिले "रैन" अरमान है।
सुप्रभात जी -----------जय जय माँ

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