जनहित में जारी
जले थे जो कभी मन में दीप वो बुझा दिये हमने,
चमच्चें याद रहे हमको शहीद भुला दिये हमने,
जिनका पेट नही भरता अपने खातिर ही रोते है,
ये गलती हमारी है ऐसे मसीहा बना दिये हमने। रैना"
जले थे जो कभी मन में दीप वो बुझा दिये हमने,
चमच्चें याद रहे हमको शहीद भुला दिये हमने,
जिनका पेट नही भरता अपने खातिर ही रोते है,
ये गलती हमारी है ऐसे मसीहा बना दिये हमने। रैना"
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