Friday, December 4, 2015


दोस्तों देखना पसंद आई के नही

भीड़ से चाहे खुद को  दूर रखा करो,
साथ में चार दोस्त जरूर रखा करो।
लूट जाये सब मगर फिर भी फ़िक्र नही,
बात में कशिश चेहरे पे नूर रखा करो।
जो शहर में न जाने कोई बात ही नही,
कूचे में अपने खुद को मशहूर रखा करो।
आइना देख कर ही इन्सान बहकता,
पाल के न दिल में तुम फितूर रखा करो।
बेस्वाद जीना भला क्या रैना"ये जीना,
हो अलग अन्दाज सा कुछ सरूर रखा करो। रैना"

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