Friday, December 4, 2015

दोस्तों के लिय खास
कोई गिला नही जो तू मिला नही,
अफ़सोस हो रहा गुल क्यों खिला नही।
है बेवफा जहाँ मतलब से प्यार है,
मिलता यहां वफ़ा का भी सिला नही।
देखो शहर में क्या ऊँचे महल बने,
इनमें बदन जले ताजा हवा नही।
गर साफ़ मन नही कैसे मिले तुझे,
उससे मिले तू क्या खुद से मिला नही।
कल रात मर गया वो आदमी बड़ा,
उसकी मजल के संग कोई चला नही।
रैना"यही गिला खुद के नसीब से,
उसने मुझे ख़ुशी का संग दिया नही। रैना"







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