Tuesday, December 1, 2015

दोस्तों ध्यान से पढ़ना  कमेंट्स भी करना
यदि अच्छी लगे तो

घटती घटनायें विचलित ध्यान कर देती,
दिल पे लगी चोट ता उम्र परेशान कर देती।
इस बस्ती के लोगों का रहन सहन है कैसा,
घरों में उठी दीवारें सबकुछ ब्यान कर देती।
प्यार की बारिश तो गुलशन को महका दे,
भाइयों की लड़ाई गुलशन वीरान कर देती।
सिर्फ परवाना ही न जल जल कर है मरता,
शमा भी तो अपना सबकुछ कुर्बान कर देती।
भारतीय नारी की ये बड़ी खासियत तो देखो,
कैसा भी हो अपने पति को भगवान कर देती।
दौलत जरूरी मगर दौलत के लिये गिरना नही,
दौलत इन्सान को अक्सर शैतान कर देती।
बारूद की दुर्गन्द न हो गोलियों की आवाजें,
काश बदली ऋतु इन्सान को इन्सान कर देती। रैना"@@copy
 दिनांक -30/11/2015 94160 76914

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