Friday, January 22, 2016

सच्ची कहानी
गरीब बच्चे भी काफी समझदार होते हैं,
दोस्तों आप बीती सुनाता हूं। इसी सप्ताह बुधवार दिनांक २० जनवरी को बदराबाद उतराखण्ड में इक शादी समारोह में सम्मलित होने का अवसर मिला। प्रात लगभग 10 बजे मैं नाश्ता कर रहा था। मैंने देखा दो गरीब बच्चें जिनके तन पर नाम मात्र के कपड़े,नंगे पैर वहां खड़े मेरी तरफ देख रहे थे। मैंने नाश्ता खत्म कर उन बच्चों से पूछा क्या पूड़ी खाओगे। उन्होंने हाँ में सर हिला दिया। जैसे ही मैंने उनके लिए प्लेट उठाई तभी कैटरिंग वाला आ गया और कहने लगा इन नाश्ता मत देना। मैंने कहा क्यों उसने कहा ये प्लेट उठा ले जायेगे। मैंने उसकी बात नही मानी और दोनों बच्चों को नाश्ता दे दिया और बच्चों को समझा दिया नाश्ता करने के  बाद प्लेट उस टब में डाल देना। बच्चे नाश्ता कर रहे थे मैं दूर खड़ा उन बच्चों को छुप के देख रहा था। नाश्ता करने के बाद उन बच्चों ने प्लेट टब में डाली एवं अब उनकी नजरें मुझे ढूंढने लगी। मुझे दूर खड़ा देख दौड़ते मेरे पास आये और मुस्करा कर बोले हमने प्लेट वहां रख दी है। इसके बाद शुरू हुआ हाथ हिलाने का सिलसिला यानि बाये बाये करने लगे। वो दूर तक हाथ हिलाते रहे। उन बच्चों को देख मुझे एहसास हुआ गरीब बच्चें काफी समझदार होते है उन्हें समझाने पढ़ाने की जरूरत है। 

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