वैष्णो माँ तेरी जय जयकार
अम्बे वैष्णो माँ मेरी,
कब होगी किरपा तेरी,
हम तो मईया कब से हैं आस लगाये बैठे,
तेरी माँ प्यारी मूर्त मन में है सजाये बैठे।
कुछ समझो माँ मजबूरी,
कम कर दो बीच की दूरी। रैना"
सुप्रभात जी --जय जय माँ
अम्बे वैष्णो माँ मेरी,
कब होगी किरपा तेरी,
हम तो मईया कब से हैं आस लगाये बैठे,
तेरी माँ प्यारी मूर्त मन में है सजाये बैठे।
कुछ समझो माँ मजबूरी,
कम कर दो बीच की दूरी। रैना"
सुप्रभात जी --जय जय माँ
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