रिश्तों की डोर,है अति कमजोर,
फिर भी इन्सां,तोड़ नही पाता,
इक फंदा टूटे,दूसरे में फस जाता।
फिर भी इन्सां --------------
दिल पे अक्सर चलती है आरी,
जिंदगी हल्की गम की गठरी भारी,
न चाहते हुए भी,हर गम उठाता।
फिर भी इन्सां ------------ रैना"
फिर भी इन्सां,तोड़ नही पाता,
इक फंदा टूटे,दूसरे में फस जाता।
फिर भी इन्सां --------------
दिल पे अक्सर चलती है आरी,
जिंदगी हल्की गम की गठरी भारी,
न चाहते हुए भी,हर गम उठाता।
फिर भी इन्सां ------------ रैना"
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