मन न हो तो दुआ मत करो,
पर किसी से दगा मत करो।
बात अच्छी रहे गर दबी,,
राख उड़ती हवा मत करो।
इश्क का खास दस्तूर है,
दर्द हो तो दवा मत करो।
दिलजलों की नज़र में रहे,
इस कदर तुम सज़ा मत करो।
बात अपनी रहें तब बनी,
छोड़ मैदां भगा मत करो।
रैना"का है फ़िक्र क्या करे,
हो इबादत मजा मत करो। रैना"
पर किसी से दगा मत करो।
बात अच्छी रहे गर दबी,,
राख उड़ती हवा मत करो।
इश्क का खास दस्तूर है,
दर्द हो तो दवा मत करो।
दिलजलों की नज़र में रहे,
इस कदर तुम सज़ा मत करो।
बात अपनी रहें तब बनी,
छोड़ मैदां भगा मत करो।
रैना"का है फ़िक्र क्या करे,
हो इबादत मजा मत करो। रैना"
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