Monday, January 4, 2016

आइना देख कर मुस्कराना नही आया।
मेरे हिस्से में दिलकश जमाना नही आया,
आंख खुलने से पहले ही टूटे हसीं सपना,
क्या करे ख्वाब हमको सजाना नही आया।
मेहनत की मगर दे गई है दगा किस्मत,
हम रहे सोते खुद को जगाना नही आया।
हम गिला बागवां से करे तो भला कैसे,
दर्द दिल का क़िसी को दिखाना नही आया।
दोष दे तो किसको खता है भला किसकी,
गम यही रैन खुद को हंसाना नही आया। रैना"

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