पास हो कर दूर रहता है वफ़ा कैसी तेरी,
कर रही मुझको दिवाना ये हवा कैसी तेरी।
देख कर तूने किया सजिदा कई ही बार है,
दर्द दिल का कम न होता ये दवा कैसी तेरी।
मौत मेरी है सगी फिर भी डरे हम तो बहुत,
कुछ समझ आता नही ये है रजा कैसी तेरी।
रात हो जब चांदनी तो चांद यौवन पे हुआ,
छा गये बादल घनेरे ये अदा कैसी तेरी।
नाम तेरा जब लिया मन को सकूं सा मिल गया,
कैद पिंजरे में किया है ये सजा कैसी तेरी। रैना"
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