ख्वाब हम फिर से सजाने लगे हैं,
वक़्त गुजरे को भुलाने लगे हैं।
ठोकरों ने ही सिखाया हमें कुछ,
सोच कर अब दिल लगाने लगे हैं।
देख कर महकी फ़िजा को कहे क्या,
नाज अरमां फिर दिखाने लगे हैं।
तोड़ मत देना भरोसा किसी का,
ये बनाने में जमाने लगे हैं।
हम खफ़ा रहने लगे थे खुद से,
रैना"खुद को फिर मनाने लगे हैं। रैना"
वक़्त गुजरे को भुलाने लगे हैं।
ठोकरों ने ही सिखाया हमें कुछ,
सोच कर अब दिल लगाने लगे हैं।
देख कर महकी फ़िजा को कहे क्या,
नाज अरमां फिर दिखाने लगे हैं।
तोड़ मत देना भरोसा किसी का,
ये बनाने में जमाने लगे हैं।
हम खफ़ा रहने लगे थे खुद से,
रैना"खुद को फिर मनाने लगे हैं। रैना"
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