दोस्तों देखना
याद के नश्तर चुबे हैं बहुत,
हम तलब में यूं जगे हैं बहुत।
है कमी कोई रहे दूर हम,
यूं मंजिल खातिर चले हैं बहुत।
हम गिला शिकवा करे तो कैसे,
आग में आशिक जले हैं बहुत।
हैं गुमां तुझको बता किसलिये,
ये चढ़े सूरज ढ़ले हैं बहुत।
जान कर रैना"बड़ा हैरान है,
टूट कर अरमां पले हैं बहुत। रैना"
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