Saturday, January 9, 2016

कड़वा सच ?????????
ये कैसी विडंबना है,
हम भारत वासी धर्म के लिए सब कुर्बान करते झुजते हैं,
जो काम क्रोध मोह माया में लिप्त उन्हें बाबा कह कर पूजते है।
अंग्रेजों के गुलाम रहे हैं इसलिए उनकी परम्परा न छोड़ पाते हैं,
मातृ भाषा हिंदी को ठुकराते तो अंग्रेजी को एकदम पचा जाते हैं। 
जिनके कपड़े विदेश में प्रेस होते थे उन्हें देश भक्त फरमाते है,
जो देश के लिए जान दे गये उन्हें पागल आतंकवादी बताते है।
वैसे हम बहुत ही धार्मिक मगर रोज घर में अंडे मुर्गे पकते हैं,
कहने को माँ बाप की सेवा वैसे माँ बाप को सूली पे टांग के रखते है।
शेष अगले अंक में

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