Thursday, November 28, 2013

nari pe jis ue

नारी पे जिसने भी बुरी नजर डाली है,
उसने खुद अपने घर को आग लगा ली है,
रावण हो दुर्योधन आसा राम हो तेजपाल,
सब ने जीते जी अपनी अर्थी निकाली है।

नारी पूज्नीय ये आदि शक्ति का अंश है,
नारी के दम से तो आगे बढ़ता वंश है,
मां बहन बेटी बन बांटती ममता प्यार,
दुखी हो चंडी बन कभी करती विध्वंश है।

"रैना" नारी का जिसने भी मान बढ़ाया है,
उसने हर क्षेत्र में रुतबा अव्वल ही पाया है,
पुरुष प्रधान समाज इतना समझता नही है,
ये विश्व आदि शक्ति मां नारी की काया माया है राजेन्द्र शर्मा रैना"
सुप्रभात जी। .......... जय जय मां   

Saturday, November 23, 2013

brhte kadmo ko

बढ़ते कदमों को रोका जाये,
अरमानों को भी टोका जाये,
अपने बारे में सोचा करते हैं,
कुछ देश के बारे सोचा जाये। रैना"
सुप्रभात जी  ……जय जय मां 
बिखरते हुये इन ख्यालों का क्या करू,
 देते नही जवाब सवालों का क्या करू,
मन में काली रात गुप अन्धेरा ही रहा,
"रैना"इस हाल में उजालो का क्या करू।"रैना"

गर वो राँझा नही तो अब वो हीर भी नही है,
खैर आशिकों की अब ऐसी तक़दीर भी नही है,
जब से लोगों ने वक्ताओं को भगवान बना दिया,
तब से इस शहर में बचा कोई फ़क़ीर ही नही है।"रैना"  

khyal me jab

ख्याल में जब तू आई,
हर तरफ से खुश्बू आई,
यूं लगा अहसास हुआ,
जान मेरी रू-ब-रू आई।  रैना"

ख्वाबों के महल बनाते रहते है,
उस में इक तस्वीर सजाते रहते है,
हैं बड़े पत्थर दिल ये जहान वाले,
ख्वाब में भी तस्वीर हटाते रहते है। रैना"

हम घर में बूढ़े मां को पानी नही पिलाते,
मगर मंदिर में वाटर कूलर दान दिया है,
"रैना"अपना मन पूरी तरह शांत अब तो,
हमने पैसे के दम से भगवान पटा लिया है। रैना"




Friday, November 22, 2013

hal mera ab puchhte nhi

दोस्तों ये ग़ज़ल आप के नाम

हाल मेरा पूछते ही नही,
नैन मेरे सूखते ही नही।
धो लिया हमने कई बार दिल,
दाग ऐसे छूटते ही नही।
यूं जमीं दिल की बंजर हो गई,
अब अंकुर भी फूटते ही नही।
हुस्न वाले जान ले छोड़ते,
वो सिरफ़ इक लूटते ही नही।
यूं लगे वो लौट आये अभी,
भ्रम दिल के टूटते ही नही।
जी रहे इत्तफाक है क्या करे,
सांस "रैना" रूठते ही नही। राजेन्द्र शर्मा "रैना"





   

Wednesday, November 20, 2013

jnmo ka ye fera hai

जन्मों का ये फेरा है,
चार दिन का डेरा है,
आगे की फ़िक्र करले,
वहां घोर अन्धेरा है। रैना"
सुप्रभात जी -----जय जय मां   

vo mujgse

साथ तो दिया नही पर इतना किया है,
बेवफा ने मुझको शायर बना दिया है।

अब हम ये काम खास करते है,
जो मिलता नही उसकी तलाश करते है। 

लगता चुनाव आ गये हैं, 
सफेद कौवें बोलने लगे हैं।   ,"रैना"

तेरे बगैर भी क्या जीना,
जिंदगी काट रहे सजा जैसे। "रैना" 

जिंदगी चल रही है लेकिन,
मौत भी मौके की तलाश में है।" रैना"

बता ख़ुशी कहां मिले है,
मुझे नही मिली यहां वो। रैना"

हास्य व्यंग्य 
इसलिये मजे चल रही ही गृहस्थ की गाड़ी है,
सलामत है पुर्जा पुर्जा सुन्दर टिकाऊ बाडी है। 
क्योकि मां की नसीहत पर ही अमल किया है,
घर में कभी न अन्य नारी का नाम लिया है।  
मां ने बताया कम खाना पर खूब गम खाना,
इधर उधर का खा ले तो उसको खूब पचाना। 
चाहे तिनका न तोड़ना पर मुंहू मत खोलना,
बोले तो बीवी का मायका कुछ भारी तोलना। 
जिसने एक चुप सो सुख की महिमा जानी है,
गृहस्थ जीवन में सुखी वो पति नामक प्राणी है। रैना"

Tuesday, November 19, 2013

janta hu mai

तुझको सबकुछ तो हासिल है,
क्यों भटके जैसे पागल है।
उसकी मरजी से सब होना, 
वो सब करने के काबिल है। 
मैं गुस्ताखी करता रहता,
तू फिर भी मुझ में शामिल है।
खुद का दुश्मन खुद को लूटे,
दौलत के खातिर पागल है।
कैसे किसको दोषी कह दे,
रैना"ही जाहिल कातिल है। राजेन्द्र शर्मा "रैना"
सुप्रभात जी। ..........  जय जय मां   

bewfa aap ko khe

बेवफा आप को हम कहे कैसे,
बेवफाई करे यार से हम भी। "रैना"

यार मेरा वफ़ादार है,बेवफा मैं दगेबाज हूं,
भूलता जा रहा हूं फर्ज,दोस्तों ख्याल करता नही। "रैना" 



उसने पत्थर उछाला नही,
हमने खुद को संभाला नही,
पीड़ा जब तलक होती नही,
हमने कांटा निकाला नही।रैना"

दर्द दिल का नही देखता कोई,
चमकते चेहरे पे नजर सबकी। "रैना"

उससे से वफ़ा की उम्मीद करते है,
मगर खुद चौबारे पे मुंहू मरते फिरते। रैना" 

Monday, November 18, 2013

teri aankho ko

तेरी आंखों को मयखाना कैसे कह दू,
मैं तो मय पीता ही नही, राजेन्द्र शर्मा "रैना"
आज फिर जिन्दगी से मुलाकात हो गई,
नजर की नजर से वो हसीं बात हो गई।
दर्द दिल में उठा सांस थमने लगी जैसे,
बे समय आंखों से मेरि बरसात हो गई।राजेन्द्र शर्मा "रैना"



भूले हुये वो यार फिर क्यों याद आते है,
वो याद आ कर दिल जलाते क्यों सताते है,
मेरे खुदा तू ही बता क्या दे सजा उनको,
जो दोस्तों की जिन्दगी दोजख बनाते है।राजेन्द्र शर्मा "रैना"
दोजख --नरक

सामने था यार पर नजरें मिलाई न गई,
होठ थे खुले मगर जुबान हिलाई न गई।
कट रहा है कैसे मेरी जिन्दगी का सफर,
बात दिल की दर्द कहानी सुनाई न गई।
आंखे अकसर पी लेती गर्म पानी मगर, 
अफ़सोस चेहरे से जरदी छुपाई न गई।
टूटे हुये अरमान मैंने रखे हैं सम्भल कर,
"रैना" अरमानों की चिता जलाई न गई।राजेन्द्र शर्मा "रैना" 

Sunday, November 17, 2013

ਚਮਤਕਾਰ ਸਾਈ ਚਮਤਕਾਰ  ਤੇਰਾ ਚਮਤਕਾਰ ਸਾਈ ਚਮਤਕਾਰ 
ਤੇਰਾ ਹਰ ਕ੍ਮ੍ਮ ਮਸਤ ਅਵੱਲਾ ਹ੍ਦੋ ਹਦ ਤੋ ਪਾਰ। 
ਚਮਤਕਾਰ ਤੇਰਾ ਚਮਤਕਾਰ ------------------------------
ਦਿਨ ਚਰ੍ਹਦਾ ਤੇ ਸ਼ਾਮ ਅਏ ਢਲਦੀ,
ਕਾਯਦੇ ਨਾਲ ਹਰ ਸ਼ੈ ਹੈ ਚਲਦੀ,
ਭੋਰਾ ਦੇਰ ਨ ਹੋਵੇ ਜਲ੍ਦੀ,
ਹਰ ਗੱਲ ਹੋਵੇ ਤੇਰੇ ਹੀ ਵੱਲ ਦੀ,
ਤੂ ਹੀ ਇਕ ਮੁਕਮ੍ਮਲ ਸਾਈ,
ਅਜਰ ਅਮਰ ਨਿਰੰਕਾਰ। 
ਚਮਤਕਾਰ ਤੇਰਾ ਚਮਤਕਾਰ -------------------------------
ਸੂਰਜ ਪਾਣੀ ਕ੍ਠਠਾ ਕਰਦਾ,
ਬਦਲ ਔਣੁ ਸਾਮ ਕੇ ਧਰਦਾ,
ਜਦੋ ਤੂ ਚਾਹਵੇ ਓਦੋ ਹੀ ਵਰਦਾ,
    

Saturday, November 16, 2013

mar jaye ge

मर जाये गे तेरी आँखों में डूब कर,
मगर मौत का जिम्मेदार तुझे ठहरा न पायेगे। राजेन्द्र शर्मा "रैना"
मुझे इस कद्र तड़फने वाले,
लगता तू भूल गया कर्मों का फल भी मिलता है। राजेन्द्र शर्मा "रैना"
तेरे अंदाज गिरगट से होते तो चलता,
अफ़सोस तेरे मिजाज नेता से तू हर बात पे राजनीति करता। राजेन्द्र शर्मा "रैना"

jiwan ik afsana

दोस्तों की नज़र इक ग़ज़ल

जीवन फसाना सा लगे है,
गम का तराना सा लगे है,
हर पल डरे हैं मौत से मन,
बनता बहाना सा लगे है।
तेरी नजर के तीर चलते,
दिल पर निशाना सा लगे है।
बिछुड़े हुये है चार पल ही,
गुजरा जमाना सा लगे है।
चर्चा शहर में हो रही अब,
"रैना"दिवाना सा लगे है। राजेन्द्र शर्मा "रैना"

ik dard

इक दर्द सीने में दबा जिसकी दवा मिलती नही,
दिल की कली मुरझा गई अब क्या करे खिलती नही,
हम जल रहे उस आग में "रैना"नजर आती नही,
अफ़सोस है इस बात का अब शाम भी ढलती नही। राजेन्द्र शर्मा "रैना"
वो सामने मेरे खड़े हम कुछ कहे कैसे भला,
ये होठ तो खुलते नही चुप है जुबां हिलती नही। 

Friday, November 15, 2013

mai wfa nhi karta

हम वफ़ा गर नही करते,तो जफ़ा भी नही करते,
हक़ अदा जो नही करते,फिर दगा भी नही करते,
लोग अब भूल बैठे हैं कर्ज अपना फर्ज यारों,
तोड़ते दिल कहे हम तो यूं खता ही नही करते।राजेन्द्र शर्मा "रैना"



mausam pal pal





हवाओं से टकराने का शौक अपना,
इसलिये तो तूफां घबराने लगे हमसे। राजेन्द्र शर्मा "रैना ""

Thursday, November 14, 2013

is bar pyaj

सूना है इस बार चुनावों में ????
प्याज फिर अपना गुस्सा दिखायेगा,  
सब्जी से दूर करने वालों को सबक सिखायेगा। 
बात साफ है इसमें क्या दिमाग लगाना है, 
अरे किसी को महबूबा से जुदा करोगे,
तो उसे गुस्सा तो आना है। 
यदि आप पर कोई ऐसा जुल्म ढायेगा,
आप को क्या गुस्सा नही आयेगा।राजेन्द्र शर्मा रैना"
    

Wednesday, November 13, 2013

tujhe se mera

तुझसे मिरा ये गिला है,
मिल कर भी तू न मिला है,
तेरी बेरुखी का ये असर है,
मुरझाया जो फूल खिला है।राजेन्द्र शर्मा "रैना"
सुप्रभात जी  ……… जय जय मां 

बेशक करने वाला रब है,
जो सोचा वो होता कब है,
परवाना जल के मिट जाता,
उससे मिलना होता तब है। राजेन्द्र शर्मा "रैना"

बदल सकता है तभी देश का मिजाज,
सोच समझ कर अपना वोट डालिये। राजेन्द्र शर्मा "रैना"

अमेरिका के नेता तभी कमाल करते हैं,
क्योकि वहाँ के लोग????
सोच समझ के अपने वोट का इस्तमाल करते हैं।राजेन्द्र शर्मा रैना" 

Tuesday, November 12, 2013

um do kdm chlo

दोस्तों आप के लिए देखिये तो

तुम दो कदम मेरी तरफ आओ,मैं चार कदम आऊगा,
तुम शमा बन के जलो तो सही,मैं परवाना बन जाऊगा।
तेरे साथ जीने मरने का वादा,तेरे दम से मेरा दम बराबर,
शाहजहां के जैसे दिखाने को,ताजमहल न बनवा पाऊगा।
कसम खुदा की तेरे हवाले कर दे,जिन्दगी का हर लम्हा,  
गर तू महकायेगी गुलशन मेरा,फिर मैं माली बन जाऊगा।             
मैंने अब से सजाने शुरू कर दिये,हसीन लम्हों के हसीं सपने,
दिन"रैन"सोचता रहता फिर मैं तुझे किस नाम से बुलाऊगा। राजेन्द्र शर्मा रैना" 

kaise manu

कैसे मानू तू हमदर्द मेरा,
समझता जो नही दर्द मेरा।
तू खुश खिलता तेरा चेहरा,
गम में डूबा मुखड़ा जर्द मेरा।राजेन्द्र शर्मा "रैना"  

Monday, November 11, 2013

rd kabhi

दर्द दिल में छुपाये नही छुपता,चेहरे पे उबर आये,
दर्द बेदर्द करता वफ़ा छोड़े जिन्दगी जब गुजर जाये। राजेन्द्र शर्मा "रैना" 


आये दिल में रहने के लिये,
ठहरे मेहमां कहने के लिये,
उनका कुछ बिगड़ा ही नही,
हम जिंदा गम सहने के लिये। राजेन्द्र शर्मा "रैना"

दिल मिरा बेकरार सा लगे है,
यूं किसी का इंतजार सा लगे है,
दास्ता ये मिरी कथा कहानी 
हो गया सनम प्यार सा लगे है।राजेन्द्र शर्मा "रैना"
  

kya majburi hai jo

क्या मज़बूरी मुलाकात करता नही,
सामने आ के क्यों बात करता नही।
दिल का गुलशन वीराना हो गया है,
प्यासी धरती तू बरसात करता नही।
दिन में बरसे धूप रात अंगारें बरसे,
प्यार बरसे वो शुभ रात करता नही।
इन्सान ने खुद के लिये कांटें बोये हैं,
खैर तू तो धर्म जात पात करता नही।
तू क्यों खफा हमसे ये बता दे मुझको,
"रैना"तुझसे और सवालात करता नही
सुप्रभात जी.………… जय जय मां  



मेरा दोस्त पूछ रहा है???
आप को कवि सम्मेलन में क्यों नही बुलाया जाता,
मेरा जवाब है जी ?????
हमसे सिर ज्यादा नही झुकाया जाता,
पूंछ को बेवजह ही नही हिलाया जाता।
मां सरस्वती के सेवक रचना पढ़ सकते हैं,
हम पैसे के लिए जी हजूरी न कर सकते हैं।
हमसे किसी बॉस को मख्खन लगाया जाता नही,
खुद को किसी गिरोह का सदस्य बनाया जाता नही।  
इसलिए हमने दोस्तों को श्रोता बना लिया है,
फेसबुक पर ही कवि मंच सजा लिया है। 
निसंदेह दोस्तों ने पूरा अरमान कर दिया है,
इक अदना से इंसान को महान कर दिया है। राजेन्द्र शर्मा "रैना"    
  

dil me bsne wale

दोस्तों मेरी इस रचना को कितने नंबर दोगे

ये दिल में बसने वाले,
नाग भी है डसने वाले।
अक्सर रोते देखे जाते,
जो ज्यादा हंसने वाले।
इश्क के चुंगल में यारों,
फस जाते बचने वाले।
अक्सर दिल पे लगते हैं,
जख्मे इश्क रिसने वाले।
लाइलाज रोग का शिकार,
जायका इश्क चखने वाले।
अब इस बस्ती में रहते,
दिल में नफरत रखने वाले।
ये जरूरी नही उस्ताद होगे,
अख़बारों में छपने वाले।
"रैना"मालिक के कहर से,
दुष्ट हरगिज न बचने वाले। राजेन्द्र शर्मा रैना"    

  

Sunday, November 10, 2013

usse yaari kar le

अब तू उससे यारी कर ले,
आगे की तैयारी कर ले।
ऐसा बाजार न मिलेगा,
नाम की खरीददारी कर ले।
ये दुःख के सिवा कुछ न दे,
उसकी खिदमतदारी कर ले।
हरपल उखड़ा सा रहता है,
तू बात कभी प्यारी कर ले।
उसकी मर्जी से निशाना लगे,
यूं क्या ख़ाक शिकारी कर ले।
 लुट रहा है नाम का खजाना,
रैना"तू भी मारा मारी कर ले। राजेन्द्र शर्मा "रैना"
 सुप्रभात जी........... जय जय मां 
   

rat bhar

तूने कब माना है,
दुःख मेरा जाना है,
कांटों की चलती है,
गुलशन वीराना है। 
दुःख तो होता अक्सर,
अपना बेगाना है। 
जीवन क्या जीवन है,
विष पीना खाना है।
इस महफ़िल में हमने,   
 आना ओ जाना है।
उससे तो मिलना है,
रैना "ने ठाना है।  राजेन्द्र शर्मा "रैना"

Saturday, November 9, 2013

rifaid tel

"रैना"रिफाईंड तेल का कुछ ऐसा असर देखते है,
लोग रास्ते से नही चलते शर्ट कट सफ़र देखते है राजेन्द्र शर्मा रैना" 

Friday, November 8, 2013

ye to tune hi btana hai

मेरे मालिक तूने ही बताना है,
तुझसे मिलने का क्या बहाना है।
बेशक ये जानता मुझको खबर है,
मैं तन्हा नही तेरे पीछे जमाना है।
तूने बख्शी है हर नयामत मुझको,
तेरा अपना तो याराना पुराना है।  
समझता हूं मैं तेरी मजबूरी को,
तूने सारी दुनिया को चलाना है।
खोल रखे हैं मैंने दिल के दरवाजे,
इनता बता मेरे घर कब आना है।
मुझ पे हुआ तेरा नजरे कर्म यारा,
लोग कहने लगे रैना"बड़ा सयाना है। राजेन्द्र शर्मा "रैना"
सुप्रभात जी  ……जय जय मां   

Thursday, November 7, 2013

main murid tu mursd mera

लड़ गई तुझसे मेरी अखियां,
कर गई जादू तेरी अखियां।
उस वक्त दम मेरा निकला,
अखियों ने जब छेड़ी अखियां। 
सब तिरे हवाले ही रख छोड़ा,
फिर क्यों तूने फेरी अखियां।
दिल पे बिजली टूट के गिरती,
अखियों ने जब घेरी अखियां।
आजकल कुछ दौर ही ऐसा,
यूं कर देती हेराफेरी अखियां।  
"रैन"भर अब तो जागते रहना,
उलझी रहे तेरी मिरी अखियां। राजेन्द्र शर्मा "रैना"    
दोस्तों ये रचना पढ़ कर आप भाग भाग हो जायेगे 

मुश्किलें देख कर कुछ हैरान सा लगता है,
मुसाफिर आजकल परेशान सा लगता है।
दूर से देखो तो बड़े शौ रूम के जैसा लगे है,
पास बैठ के खोलो बंद दुकान सा लगता है।
देश के लिये कुछ खास करे ऐसा सोचना नही,
अब नेता शातिर लोमड़ी शैतान सा लगता है।
दिलों में भरा लावा किसी वक्त फूट सकता है,
भारत देश में आने वाला तूफ़ान सा लगता है। 
"रैना"तेरा आशिक इक तुझ पे ही फ़िदा यारा,
सच कहता दोस्त तू मेरी जान सा लगता है।राजेन्द्र शर्मा रैना"    
 

isliye pichhe rha

दोस्तों आप के लिए

इसलिये हम रहे पीछे सिर झुकाना नही आया।
दुःख सहे दिल किसी का यूं जुल्म ढाना नही आया,
आदमी काम के हम भी ये खबर तो हमें रहती,
दोष अपना यही मख्खन ही लगाना नही आया।राजेन्द्र शर्मा "रैना"

     

खुद से लड़ने की हिम्मत न हुई,
उससे हमको मोहब्बत न हुई,
कैसे बदले दुनिया ये सोच लगी ,
बदली अपनी ही आदत न हुई। राजेन्द्र शर्मा "रैना"

Wednesday, November 6, 2013

hatho ki lkiro



व्यंग्य कविता प्याज

शीला जी ने इतना जरूर किया है,
प्याज को सब्जियों से दूर किया है,
दिग्गविजय का कहना????
हम भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ायेगे,
नर मादा में कुछ अंतर लायेगे,
इसी कड़ी में टमाटर को भी,
सब्जियों से दूर भगायेगे।
इससे गंदगी की होगी सफाई,
जनता की घर बैठे होगी कमाई।
जनता जो पैसा टमाटर प्याज से बचायेगी,
कम से कम बढ़ी कीमत दे गैस सिलेंडर ले आये गी।
दिग्गी कहते इसे कहते है दिमाग,
देखो आम के आम गुठलियों के दाम।
बिना टमाटर प्याज के सब्जी खाओ,
कहो प्यार से जय श्री राम। राजेन्द्र शर्मा रैना"    

desh ke khatir

देश की तस्वीर तक़दीर बदलने का दावा करने वाले,
अपनी ही तस्वीर तक़दीर बदलते रहे,
घर भरने के बाद विदेशी बैंक भरते रहे,
मतलब फ़रोसो ने देश को खूब निचौड़ा है,
इन जोकों ने चूस लिया खून इक बूंद न छोड़ा है।राजेन्द्र शर्मा "रैना" 

Tuesday, November 5, 2013

a bewfa ja

ये शेर आप के लिए तोहफा

जा बेवफा जा और मत सता,
हां माफ़ कर दी तेरी हर खता,
मुश्किल परेशानी यही है मुझे,
दिल में बसे क्या दे तुझे सजा। रैना"
   

bahn ko mila nhi

भाईदूज विशेष

प्यार दिल में न नेक इरादा है,
भाई ने बहाना खूब तराशा ?????
बहन मैं आ न पाया काम ज्यादा है।
बेबस बहन भाई का इंतजार करती रही,
तिलक लगाने की चाह में भूखी मरती रही।
भाई कि याद में बहन बेचारी फूट फूट रोती,
मगर भाईदूज के दिन भी?????
पत्थर दिल भाई की मजबूरी कम नही होती।
भौतिकवाद के इस दौर ने इतना असर तो किया है,
रिश्तों के मामले में इंसान को संवेदनशील बना दिया है।
मतलब से बंधा अब हर रिश्ता नाता है,
कोई मतलब हो तभी भाई राखी बंधवाने,
अथवा तिलक लगवाने आता है।
वरना मज़बूरी ही बताता है। राजेन्द्र शर्मा रैना"   

magar tu kbhi

दूसरी तरफ जाते कदम मत रोकना,
पर कभी तू मिरे बारे में भी सोचना।
हमदर्द हम तिरे इसलिये शिकवा करे'
मैं तिरा क्या मुझे क्यों तुझे है टोकना।राजेन्द्र शर्मा "रैना"

Monday, November 4, 2013

maa baap


रुखा सुखा जो मिले सब स्वीकार है,
मां बाप की हसरत बच्चों का प्यार है,
गर बच्चे सुखी तो मां बाप की ख़ुशी,
बच्चों के लिए ही रब से दुआ पुकार है। राजेन्द्र शर्मा "रैना"

gddaro ka pkshdhr ban gya

गद्दारों का पक्षदर बन गया सारथी,
फूट फुट कर रो रही मेरी मां भारती।
कहने को पवित्र मगर गंदगी ढो रही,
गंगा दुखी जो देश का भाग्य सवांरती।
आजाद हो कर भी हम कोरे गुलाम हैं,
दिलों पे राज करते है अब भी फ़ारसी।
नैतिकता का पतन इस कद्र हो गया, 
देश के मसीहा भी बन गये हैं आढ़ती।
बीच चौराहे में अब चीर हरण हो रहा,
सुनने वाला कोई नही अबला पुकारती।
धर्म जात के नाम पे सारा देश है बटा, 
देश के रहनुमा अब तो बनते शरारती।
"रैना"जो देश के खातिर कुर्बान होगे,
ऐसे बेटों की भारत माता उतारे आरती। राजेन्द्र शर्मा रैना"
सुप्रभात जी। ....... जय जय मां  

hmne tujhe dil

हमने उसे दिल में बसा लिया है,
बुत को खुदा अपना बना लिया है।
जिस दर्द के अहसास में मजा है,
उस दर्द को दिल में जगा लिया है।
अब खबर ये होने लगी यकायक,
इक रोग खुद को क्यों लगा लिया है।
इस बात का सरेआम क्यों जिकर है,
हमने किसी से दिल लगा लिया है।
किससे शिकायत हम करे बताओ,
उसने हमें हम से चुरा लिया है। राजेन्द्र शर्मा रैना"

dil jla ke


दोस्तों प्यार से सुनो ग़ज़ल

जुल्म ढाती रही रात काली,
दिल जला के मनाई दिवाली।
चांद से शिकवा करे है चकोरा,
रैन आती नही मिलन वाली।  
कसर हम भी नही छोड़ते पर,
क्या करे आजकल जेब खाली।
याद उसकी रहे पास हरदम,
बेवफा ने कसम तोड़ डाली।
ये समझ से परे क्या करे हम,
किसलिये क्यों खफा बाग़ माली।राजेन्द्र शर्मा "रैना"
 

।  

kagaj pe chhap ke

कागज पे छप के दीवारो पे चढ़ के,
फिर आये भिखारी कारों पे चढ़ के,
मेरे देश का दुर्भाग्य नही तो क्या है,
हम करते है मतदान नारों पे चढ़ के। राजेन्द्र शर्मा "रैना" 

roshan shahar

कुर्सी पे काबिज गिरगट देश का ढंग बदलना चाहते है,
भला उनकी क्या गलती जो वो अपना रंग बदल जाते है। 
बातों के शेर बातों की रेत से गिरगट बस्ती बसा रहे है,
क्या बुरा जो गन्दी बस्तियां हटा अपना महल बना रहे है।
लोग नेताओं पर विदेशों में पैसा जमा का आरोप लगते हैं,
अरे भाई ऐसे नेता तो विदेशों में भारत का मान बढ़ाते हैं। 
नेताओं पर ये भी आरोप नेता परिवारवाद को बढ़ावा देते है,
ऐसा कुछ नही नेता सिर्फ अपने दामाद के दोष छुपा लेते है।
वैसे भी भारतीय संस्कृति में दामाद के नाम लिखी लूट होती है,
वो कुछ भी करे दामाद को मनमर्जी करने की पूरी छूट होती है।
वैसे नेताओं के कारनामें देख ऐसा लगता है वो जल्दी आयेगे,
जब काले अंग्रेज चम्मचें देश को गिरवी धर कर हाथ हिलायेंगे। राजेन्द्र शर्मा "रैना"  
  

Sunday, November 3, 2013

kanto ne

कांटों ने सिखाया मुझे चलने का ढंग,
वर्ना हम फिर भटक गये होते,

तेरी यादें दिल से हो के गुजरी,
दीवाली की शब भी रो के गुजरी,
दोस्त की फितरत से वाकिफ है हम,
तेरी दीवाली तो सो के गुजरी। राजेन्द्र शर्मा "रैना"
सुप्रभात जी  ……… जय जय मां  

diwaro pe siln nmi lge hai,

आखों में सीलन नमी लगे है,
जिंदगी में कोई कमी लगे है।
पत्थर सीने पे रखे हुये है,
जीते जी सांसे थमी लगे है। राजेन्द्र शर्मा "रैना"


khud ko kuchh aese


दोस्तों के लिए खास ग़ज़ल

खुद को मरने से यूं बचा लेते,
हम हवा से सांसे चुरा लेते।
रास हमको आता नही रोना,
दर्द से रिश्ता हम बना लेते।
दिल जला करके फिर दुआ मांगे,
यूं दिवाली आशिक मना लेते।
इश्क में तो होता दगा फिर भी,
दिलजले जोखिम ये उठा लेते।
काश"रैना"को इतनी समझ आती,
बावफा से ये दिल लगा लेते। राजेन्द्र शर्मा "रैना"

Saturday, November 2, 2013

aayodhya me

हर घर में रौशनी आबाद हो दोस्तों,
प्रेम का पाठ सब को याद हो दोस्तों,
"रैना"हरदम दोस्तों की खैर मांगता,
सब को दिवाली मुबारखबाद हो दोस्तों। राजेन्द्र शर्मा "रैना"
     


tere ghar me

घर तिरा रोशन दिवाली है,
रैन" अपनी फ़क़त काली है। राजेन्द्र शर्मा "रैना"

हादसे ये अजीब होने लगे हैं,
दूर हैं जो करीब होने लगे हैं। राजेन्द्र शर्मा "रैना"

pyaj ne diwali

महंगाई ने आम आदमी जीते जी मारा है,
देखो प्याज ने दिवाली का स्वाद बिगाड़ा है,
बीवी कर रही शौहर से प्याज की शिकायत,
सुनते हो पतीला चूल्हे पे न चढ़ा हमारा है। 
शौहर बोला??????
तू क्या शीला भी प्याज के आंसू रो रही है,
चुनाव सिर पे??? 
पतीले में प्याज नही बड़ी चिंता हो रही है। 
नेताओं का डर प्याज कहीं इतिहास न दोहराये,
पहले कि तरह नीचे से कुर्सी न खींच ले जाये।  राजेन्द्र शर्मा "रैना" 

Friday, November 1, 2013

aao mnaye

रोशन हो मन की रात काली,
अब मनाये कुछ ऐसे दीवाली।
टूटी कड़ियों को मिलाते जाये,
हम दीप से दीप जलाते जाये।
नफरत कि दीवारें हटाते जाये,
बिछुड़ों को गले से लगाते जाये।
सब धर्मों का यही सार है प्यारे,
हम खुद को इन्सान बनाते जाये।     
उन चक्करों का कुछ ख्याल करे,
सिर पे चढ़ा कर्ज चुकाते जाये।
याद करे तुझे फिर जहान वाले,
रैना"कुछ ऐसा कर दिखाते जाये। राजेन्द्र शर्मा रैना"