Tuesday, November 5, 2013

bahn ko mila nhi

भाईदूज विशेष

प्यार दिल में न नेक इरादा है,
भाई ने बहाना खूब तराशा ?????
बहन मैं आ न पाया काम ज्यादा है।
बेबस बहन भाई का इंतजार करती रही,
तिलक लगाने की चाह में भूखी मरती रही।
भाई कि याद में बहन बेचारी फूट फूट रोती,
मगर भाईदूज के दिन भी?????
पत्थर दिल भाई की मजबूरी कम नही होती।
भौतिकवाद के इस दौर ने इतना असर तो किया है,
रिश्तों के मामले में इंसान को संवेदनशील बना दिया है।
मतलब से बंधा अब हर रिश्ता नाता है,
कोई मतलब हो तभी भाई राखी बंधवाने,
अथवा तिलक लगवाने आता है।
वरना मज़बूरी ही बताता है। राजेन्द्र शर्मा रैना"   

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