Wednesday, November 20, 2013

vo mujgse

साथ तो दिया नही पर इतना किया है,
बेवफा ने मुझको शायर बना दिया है।

अब हम ये काम खास करते है,
जो मिलता नही उसकी तलाश करते है। 

लगता चुनाव आ गये हैं, 
सफेद कौवें बोलने लगे हैं।   ,"रैना"

तेरे बगैर भी क्या जीना,
जिंदगी काट रहे सजा जैसे। "रैना" 

जिंदगी चल रही है लेकिन,
मौत भी मौके की तलाश में है।" रैना"

बता ख़ुशी कहां मिले है,
मुझे नही मिली यहां वो। रैना"

हास्य व्यंग्य 
इसलिये मजे चल रही ही गृहस्थ की गाड़ी है,
सलामत है पुर्जा पुर्जा सुन्दर टिकाऊ बाडी है। 
क्योकि मां की नसीहत पर ही अमल किया है,
घर में कभी न अन्य नारी का नाम लिया है।  
मां ने बताया कम खाना पर खूब गम खाना,
इधर उधर का खा ले तो उसको खूब पचाना। 
चाहे तिनका न तोड़ना पर मुंहू मत खोलना,
बोले तो बीवी का मायका कुछ भारी तोलना। 
जिसने एक चुप सो सुख की महिमा जानी है,
गृहस्थ जीवन में सुखी वो पति नामक प्राणी है। रैना"

No comments:

Post a Comment