Monday, November 4, 2013

hmne tujhe dil

हमने उसे दिल में बसा लिया है,
बुत को खुदा अपना बना लिया है।
जिस दर्द के अहसास में मजा है,
उस दर्द को दिल में जगा लिया है।
अब खबर ये होने लगी यकायक,
इक रोग खुद को क्यों लगा लिया है।
इस बात का सरेआम क्यों जिकर है,
हमने किसी से दिल लगा लिया है।
किससे शिकायत हम करे बताओ,
उसने हमें हम से चुरा लिया है। राजेन्द्र शर्मा रैना"

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