क्या मज़बूरी मुलाकात करता नही,
सामने आ के क्यों बात करता नही।
दिल का गुलशन वीराना हो गया है,
प्यासी धरती तू बरसात करता नही।
दिन में बरसे धूप रात अंगारें बरसे,
प्यार बरसे वो शुभ रात करता नही।
इन्सान ने खुद के लिये कांटें बोये हैं,
खैर तू तो धर्म जात पात करता नही।
तू क्यों खफा हमसे ये बता दे मुझको,
"रैना"तुझसे और सवालात करता नही
सुप्रभात जी.………… जय जय मां
सामने आ के क्यों बात करता नही।
दिल का गुलशन वीराना हो गया है,
प्यासी धरती तू बरसात करता नही।
दिन में बरसे धूप रात अंगारें बरसे,
प्यार बरसे वो शुभ रात करता नही।
इन्सान ने खुद के लिये कांटें बोये हैं,
खैर तू तो धर्म जात पात करता नही।
तू क्यों खफा हमसे ये बता दे मुझको,
"रैना"तुझसे और सवालात करता नही
सुप्रभात जी.………… जय जय मां
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