Friday, November 22, 2013

hal mera ab puchhte nhi

दोस्तों ये ग़ज़ल आप के नाम

हाल मेरा पूछते ही नही,
नैन मेरे सूखते ही नही।
धो लिया हमने कई बार दिल,
दाग ऐसे छूटते ही नही।
यूं जमीं दिल की बंजर हो गई,
अब अंकुर भी फूटते ही नही।
हुस्न वाले जान ले छोड़ते,
वो सिरफ़ इक लूटते ही नही।
यूं लगे वो लौट आये अभी,
भ्रम दिल के टूटते ही नही।
जी रहे इत्तफाक है क्या करे,
सांस "रैना" रूठते ही नही। राजेन्द्र शर्मा "रैना"





   

No comments:

Post a Comment