Sunday, November 10, 2013

rat bhar

तूने कब माना है,
दुःख मेरा जाना है,
कांटों की चलती है,
गुलशन वीराना है। 
दुःख तो होता अक्सर,
अपना बेगाना है। 
जीवन क्या जीवन है,
विष पीना खाना है।
इस महफ़िल में हमने,   
 आना ओ जाना है।
उससे तो मिलना है,
रैना "ने ठाना है।  राजेन्द्र शर्मा "रैना"

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