Tuesday, November 19, 2013

janta hu mai

तुझको सबकुछ तो हासिल है,
क्यों भटके जैसे पागल है।
उसकी मरजी से सब होना, 
वो सब करने के काबिल है। 
मैं गुस्ताखी करता रहता,
तू फिर भी मुझ में शामिल है।
खुद का दुश्मन खुद को लूटे,
दौलत के खातिर पागल है।
कैसे किसको दोषी कह दे,
रैना"ही जाहिल कातिल है। राजेन्द्र शर्मा "रैना"
सुप्रभात जी। ..........  जय जय मां   

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