Thursday, November 7, 2013

isliye pichhe rha

दोस्तों आप के लिए

इसलिये हम रहे पीछे सिर झुकाना नही आया।
दुःख सहे दिल किसी का यूं जुल्म ढाना नही आया,
आदमी काम के हम भी ये खबर तो हमें रहती,
दोष अपना यही मख्खन ही लगाना नही आया।राजेन्द्र शर्मा "रैना"

     

खुद से लड़ने की हिम्मत न हुई,
उससे हमको मोहब्बत न हुई,
कैसे बदले दुनिया ये सोच लगी ,
बदली अपनी ही आदत न हुई। राजेन्द्र शर्मा "रैना"

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