गद्दारों का पक्षदर बन गया सारथी,
फूट फुट कर रो रही मेरी मां भारती।
कहने को पवित्र मगर गंदगी ढो रही,
गंगा दुखी जो देश का भाग्य सवांरती।
आजाद हो कर भी हम कोरे गुलाम हैं,
दिलों पे राज करते है अब भी फ़ारसी।
नैतिकता का पतन इस कद्र हो गया,
देश के मसीहा भी बन गये हैं आढ़ती।
बीच चौराहे में अब चीर हरण हो रहा,
सुनने वाला कोई नही अबला पुकारती।
धर्म जात के नाम पे सारा देश है बटा,
देश के रहनुमा अब तो बनते शरारती।
"रैना"जो देश के खातिर कुर्बान होगे,
ऐसे बेटों की भारत माता उतारे आरती। राजेन्द्र शर्मा रैना"
सुप्रभात जी। ....... जय जय मां
फूट फुट कर रो रही मेरी मां भारती।
कहने को पवित्र मगर गंदगी ढो रही,
गंगा दुखी जो देश का भाग्य सवांरती।
आजाद हो कर भी हम कोरे गुलाम हैं,
दिलों पे राज करते है अब भी फ़ारसी।
नैतिकता का पतन इस कद्र हो गया,
देश के मसीहा भी बन गये हैं आढ़ती।
बीच चौराहे में अब चीर हरण हो रहा,
सुनने वाला कोई नही अबला पुकारती।
धर्म जात के नाम पे सारा देश है बटा,
देश के रहनुमा अब तो बनते शरारती।
"रैना"जो देश के खातिर कुर्बान होगे,
ऐसे बेटों की भारत माता उतारे आरती। राजेन्द्र शर्मा रैना"
सुप्रभात जी। ....... जय जय मां
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