Saturday, November 16, 2013

jiwan ik afsana

दोस्तों की नज़र इक ग़ज़ल

जीवन फसाना सा लगे है,
गम का तराना सा लगे है,
हर पल डरे हैं मौत से मन,
बनता बहाना सा लगे है।
तेरी नजर के तीर चलते,
दिल पर निशाना सा लगे है।
बिछुड़े हुये है चार पल ही,
गुजरा जमाना सा लगे है।
चर्चा शहर में हो रही अब,
"रैना"दिवाना सा लगे है। राजेन्द्र शर्मा "रैना"

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