दोस्तों की नज़र इक ग़ज़ल
जीवन फसाना सा लगे है,
गम का तराना सा लगे है,
हर पल डरे हैं मौत से मन,
बनता बहाना सा लगे है।
तेरी नजर के तीर चलते,
दिल पर निशाना सा लगे है।
बिछुड़े हुये है चार पल ही,
गुजरा जमाना सा लगे है।
चर्चा शहर में हो रही अब,
"रैना"दिवाना सा लगे है। राजेन्द्र शर्मा "रैना"
जीवन फसाना सा लगे है,
गम का तराना सा लगे है,
हर पल डरे हैं मौत से मन,
बनता बहाना सा लगे है।
तेरी नजर के तीर चलते,
दिल पर निशाना सा लगे है।
बिछुड़े हुये है चार पल ही,
गुजरा जमाना सा लगे है।
चर्चा शहर में हो रही अब,
"रैना"दिवाना सा लगे है। राजेन्द्र शर्मा "रैना"
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