दोस्तों ये रचना पढ़ कर आप भाग भाग हो जायेगे
मुश्किलें देख कर कुछ हैरान सा लगता है,
मुसाफिर आजकल परेशान सा लगता है।
दूर से देखो तो बड़े शौ रूम के जैसा लगे है,
पास बैठ के खोलो बंद दुकान सा लगता है।
देश के लिये कुछ खास करे ऐसा सोचना नही,
अब नेता शातिर लोमड़ी शैतान सा लगता है।
दिलों में भरा लावा किसी वक्त फूट सकता है,
भारत देश में आने वाला तूफ़ान सा लगता है।
"रैना"तेरा आशिक इक तुझ पे ही फ़िदा यारा,
सच कहता दोस्त तू मेरी जान सा लगता है।राजेन्द्र शर्मा रैना"
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