दोस्तों के लिए खास ग़ज़ल
खुद को मरने से यूं बचा लेते,
हम हवा से सांसे चुरा लेते।
रास हमको आता नही रोना,
दर्द से रिश्ता हम बना लेते।
दिल जला करके फिर दुआ मांगे,
यूं दिवाली आशिक मना लेते।
इश्क में तो होता दगा फिर भी,
दिलजले जोखिम ये उठा लेते।
काश"रैना"को इतनी समझ आती,
बावफा से ये दिल लगा लेते। राजेन्द्र शर्मा "रैना"
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