कुर्सी पे काबिज गिरगट देश का ढंग बदलना चाहते है,
भला उनकी क्या गलती जो वो अपना रंग बदल जाते है।
बातों के शेर बातों की रेत से गिरगट बस्ती बसा रहे है,
क्या बुरा जो गन्दी बस्तियां हटा अपना महल बना रहे है।
लोग नेताओं पर विदेशों में पैसा जमा का आरोप लगते हैं,
अरे भाई ऐसे नेता तो विदेशों में भारत का मान बढ़ाते हैं।
नेताओं पर ये भी आरोप नेता परिवारवाद को बढ़ावा देते है,
ऐसा कुछ नही नेता सिर्फ अपने दामाद के दोष छुपा लेते है।
वैसे भी भारतीय संस्कृति में दामाद के नाम लिखी लूट होती है,
वो कुछ भी करे दामाद को मनमर्जी करने की पूरी छूट होती है।
वैसे नेताओं के कारनामें देख ऐसा लगता है वो जल्दी आयेगे,
जब काले अंग्रेज चम्मचें देश को गिरवी धर कर हाथ हिलायेंगे। राजेन्द्र शर्मा "रैना"
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