दोस्तों मेरी इस रचना को कितने नंबर दोगे
ये दिल में बसने वाले,
नाग भी है डसने वाले।
अक्सर रोते देखे जाते,
जो ज्यादा हंसने वाले।
इश्क के चुंगल में यारों,
फस जाते बचने वाले।
अक्सर दिल पे लगते हैं,
जख्मे इश्क रिसने वाले।
लाइलाज रोग का शिकार,
जायका इश्क चखने वाले।
अब इस बस्ती में रहते,
दिल में नफरत रखने वाले।
ये जरूरी नही उस्ताद होगे,
अख़बारों में छपने वाले।
"रैना"मालिक के कहर से,
दुष्ट हरगिज न बचने वाले। राजेन्द्र शर्मा रैना"
ये दिल में बसने वाले,
नाग भी है डसने वाले।
अक्सर रोते देखे जाते,
जो ज्यादा हंसने वाले।
इश्क के चुंगल में यारों,
फस जाते बचने वाले।
अक्सर दिल पे लगते हैं,
जख्मे इश्क रिसने वाले।
लाइलाज रोग का शिकार,
जायका इश्क चखने वाले।
अब इस बस्ती में रहते,
दिल में नफरत रखने वाले।
ये जरूरी नही उस्ताद होगे,
अख़बारों में छपने वाले।
"रैना"मालिक के कहर से,
दुष्ट हरगिज न बचने वाले। राजेन्द्र शर्मा रैना"
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