कांटों ने सिखाया मुझे चलने का ढंग,
वर्ना हम फिर भटक गये होते,
तेरी यादें दिल से हो के गुजरी,
दीवाली की शब भी रो के गुजरी,
दोस्त की फितरत से वाकिफ है हम,
तेरी दीवाली तो सो के गुजरी। राजेन्द्र शर्मा "रैना"
सुप्रभात जी ……… जय जय मां
वर्ना हम फिर भटक गये होते,
तेरी यादें दिल से हो के गुजरी,
दीवाली की शब भी रो के गुजरी,
दोस्त की फितरत से वाकिफ है हम,
तेरी दीवाली तो सो के गुजरी। राजेन्द्र शर्मा "रैना"
सुप्रभात जी ……… जय जय मां
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