गम में रोना छोड़ दिया हमने,
क्योंकि बात तो हंस के बनती है। रैना"
ख्वाहिशों का अंत नही,हरपल पैदा होती,
जवां होकर बूढ़ी मर जाती,
दिल है के फिर भी मानता ही नही। रैना"
अब जाम न साकी है,
बस इक हसरत बाकी है,
हम गुनाह बख्शा लेते,
तेरे क़दमों में गिर कर। रैना"
क्योंकि बात तो हंस के बनती है। रैना"
ख्वाहिशों का अंत नही,हरपल पैदा होती,
जवां होकर बूढ़ी मर जाती,
दिल है के फिर भी मानता ही नही। रैना"
अब जाम न साकी है,
बस इक हसरत बाकी है,
हम गुनाह बख्शा लेते,
तेरे क़दमों में गिर कर। रैना"
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