नैना छलके तड़फे दिल है,
हमदम ही मेरा कातिल है।
बरबादी की इस साज़िश में,
कोई अपना ही शामिल है।
रंग बदले पैसे के खातिर,
इन्सां हो जाता जाहिल है।
खुद में मैंने पाया तुझको,
मन्जिल तू मेरा साहिल है।
हर महफ़िल में तेरी चर्चा,
बेशक तू ही इस काबिल है।
रंग बैठा खुद को उस रंग में,
रैना"तो आशिक पागल है। रैना"
हमदम ही मेरा कातिल है।
बरबादी की इस साज़िश में,
कोई अपना ही शामिल है।
रंग बदले पैसे के खातिर,
इन्सां हो जाता जाहिल है।
खुद में मैंने पाया तुझको,
मन्जिल तू मेरा साहिल है।
हर महफ़िल में तेरी चर्चा,
बेशक तू ही इस काबिल है।
रंग बैठा खुद को उस रंग में,
रैना"तो आशिक पागल है। रैना"
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