इश्क में बनता अक्सर यही अफ़साना,
गुजरे मौसम के जैसे भूल मत जाना,
शाम ढलने तक इक कसक रहे बाकी,
तेरी याद में तड़फता रह जाये दीवाना।
याद रह गये बस जिन्दगी के दो लम्हें,
जिन्दगी में आना तेरा लौट के जाना।
बिखरे हुये को भी सम्भाल के है रखा,
शाला सलामत रहे कायम मयख़ाना।
हम कैसे भूल जाये उस हसीन पल को,
फूल सी महक तेरा कली सा मुस्काना।
गुजरे मौसम के जैसे भूल मत जाना,
शाम ढलने तक इक कसक रहे बाकी,
तेरी याद में तड़फता रह जाये दीवाना।
याद रह गये बस जिन्दगी के दो लम्हें,
जिन्दगी में आना तेरा लौट के जाना।
बिखरे हुये को भी सम्भाल के है रखा,
शाला सलामत रहे कायम मयख़ाना।
हम कैसे भूल जाये उस हसीन पल को,
फूल सी महक तेरा कली सा मुस्काना।
No comments:
Post a Comment