Thursday, October 10, 2013

दोस्तों के लिए खास

हम तन्हा बैठे हाथों की लकीरें देखते है,
ख्वाबो के महल बनाते तेरे बारे सोचते है।
नादान  दिल न जाने क्यों बहक जाता है,
वैसे हम इस दिल को बहुत ही रोकते है।
तुझको खबर नही हम भला क्या कर ले,
लोग तेरा नाम लेकर अब मुझे टोकते है।
दुनिया वाले तो इश्क से नफरत करते,
आशिकों पे गली के कुत्ते अक्सर भौंकते है।
"रैना" की फितरत सच को सच कहना,
हाथ पकड़ के फिर न हम कभी छोड़ते है। राजेन्द्र "रैना" 

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