दोस्तों की नजर इक ग़ज़ल
है खबर ये तो ठिकाना ही नही,
आदमी बेपीर माना ही नही।
चेहरा करता ब्यां दिल की तड़फ,
दाग दिल का तो दिखाना ही नही।
ये शहर तेरा मिरे काबिल नही,
जीने का कोई बहाना ही नही।
हम हुये बरबाद है शिकवा यही,
यार उसने सबब जाना ही नही।
जिन्दगी का राग यूँ गाते रहे,
मौज मस्ती वो तराना ही नही।
अब चलो चलते पुराने घर वही,
लौट के फिर "रैन"आना ही नही। राजेन्द्र रैना"
है खबर ये तो ठिकाना ही नही,
आदमी बेपीर माना ही नही।
चेहरा करता ब्यां दिल की तड़फ,
दाग दिल का तो दिखाना ही नही।
ये शहर तेरा मिरे काबिल नही,
जीने का कोई बहाना ही नही।
हम हुये बरबाद है शिकवा यही,
यार उसने सबब जाना ही नही।
जिन्दगी का राग यूँ गाते रहे,
मौज मस्ती वो तराना ही नही।
अब चलो चलते पुराने घर वही,
लौट के फिर "रैन"आना ही नही। राजेन्द्र रैना"
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