माँ कात्यायनी जग कल्याणी,
जन जन की यही पुकार,
दुष्टों का अब राज हुआ,
तुम आ जाओ इक बार,
तुम आ जाओ इक बार,
माँ हो के शेर सवार।
तुम आ जाओ ……
चारों तरफ है घना अँधेरा,
हर कोई करता मेरा मेरा,
सब हैं मतलबी ढोंगी फरेबी,
सब को मोह माया ने घेरा,
तेरे भक्तो का मात कत्यानी,
जीना हुआ दुशवार।
तुम आ जाओ इक बार ,
माँ आ जाओ … …
रैना" दर्शन का अभिलाषी,
तरसे मन मोरा अखियाँ प्यासी,
सुन ले मेरी अर्ज माँ विनती,
दूर माँ कर दे मेरी उदासी,
बच्चे तेरे भटक रहे माँ,
माँ बिगड़ी मेरी संवार।
माँ आ जाओ इक बार ,
माँ आ जाओ। …. राजेन्द्र रैना"
सुप्रभात जी … जय जय माँ
जन जन की यही पुकार,
दुष्टों का अब राज हुआ,
तुम आ जाओ इक बार,
तुम आ जाओ इक बार,
माँ हो के शेर सवार।
तुम आ जाओ ……
चारों तरफ है घना अँधेरा,
हर कोई करता मेरा मेरा,
सब हैं मतलबी ढोंगी फरेबी,
सब को मोह माया ने घेरा,
तेरे भक्तो का मात कत्यानी,
जीना हुआ दुशवार।
तुम आ जाओ इक बार ,
माँ आ जाओ … …
रैना" दर्शन का अभिलाषी,
तरसे मन मोरा अखियाँ प्यासी,
सुन ले मेरी अर्ज माँ विनती,
दूर माँ कर दे मेरी उदासी,
बच्चे तेरे भटक रहे माँ,
माँ बिगड़ी मेरी संवार।
माँ आ जाओ इक बार ,
माँ आ जाओ। …. राजेन्द्र रैना"
सुप्रभात जी … जय जय माँ
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