Monday, October 7, 2013

kushmada maa

कूष्मांडा माँ किरपा तेरी,
कटे ख़ुशी से जिन्दगी मेरी,
अब हसरत तेरे दीदार की,
सूखी धरती पड़ी दरारें,
कर बारिस तेरे प्यार की।
माँ कर बारिस तेरे प्यार की.
कर बारिस  …. कर बारिस
गम की आग से जला तन मन,
निरंतर बढ़ती जाये है उलझन,
सारी दुनिया बनी अब दुश्मन,
तू भी खफा माँ न देती दर्शन,
खता मेरी माँ माफ़ करो,
हद हो गई है इन्तजार की।
कर बारिस  ……
मैं मतलबी मेरी मजबूरी,
कम कर दे माँ बीच की दूरी,
अपनी अब तो दे दे मंजूरी,
माँ बेटे का मिलन है जरूरी,
रहमत की माँ नजर तू कर दे,
ऋतू आ जाये फिर बहार कि.
कर बारिस  ……. राजेन्द्र रैना" 
सुप्रभात जी    …… जय जय माँ   
 

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