Tuesday, October 29, 2013

dusro ki rchnaye

स्टेजों पे कूल्हे मटकाने वाले,
दूसरो की रचनायें चुराने वाले,
कुछ शायर कवि बने मेरे शहर में,
चालबाजी नाटक दिखाने वाले। राजेन्द्र शर्मा "रैना"
  

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