Sunday, October 27, 2013

dosto ki

दोस्तों की दुआ का असर है,
बज्म



अपनी किस्मत के मिजाज ठंडे है,
इसलिए अपने लिए हर दिन संडे है। राजेन्द्र शर्मा "रैना"

गर नसीबों में जुदाई वो न लिखता,
फिर जमाना भी जुदा हरगिज न करता। राजेन्द्र शर्मा "रैना"

लकीरें हाथ की मैं देखता अक्सर,
नही बदली यही अरमान बाकी है,
भरोसा अब तलक टूटा नही मेरा,
उठी दिल में तड़फ तूफ़ान बाकी है। राजेंद्र शर्मा "रैना" 

दिल की लगी मैं क्या बताऊ यारों,
मैं रात आँखों में बिताऊ यारों,
हाँ याद उनकी जान की दुश्मन है,
मैं जिन्दगी कैसे बचाऊ यारों।
हंसते सभी ही हाल पे क्यों मेरे,
मैं दर्द अपना जब सुनाऊ यारों।
वाकिफ नही वो हाल से दिलबर जो, 
मैं चीर कर दिल क्यों दिखाऊ यारों।
है गर नही मेरी उसे चिन्ता कोई,
ये बेहतर उसको भुलाऊ यारों।
अब दिन सुधर जाये भरोसा कम है , 
मैं क्यों न उस से दिल लगाऊ यारों। राजेन्द्र शर्मा "रैना"

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