Sunday, October 13, 2013

face

फेसबुक के दोस्त दोस्ती का ये सिला देते हैं,
दोस्त की अच्छी रचना झट चोरी कर लेते हैं। राजिन्द्र शर्मा रैना
मेरे इक जिगरी दोस्त का ये कहना दोस्तों,
रचना चुराने वाले किसी चोर के बेटी या बेटे है।


दोस्तों के लिये खास तोहफा

मरने के बाद भी तन्हा न दीवाना होगा,
साथ मेरे तेरी यादों का खजाना होगा।
उस दिन मेरे दिल में दर्द उठे गा बहुत,
जब तेरा मेरी कब्र,मजार पे आना होगा।
सोच समझ ले तू भी हवा में उड़ने वाले,
इक दिन तो तेरा खून भी बेगाना होगा।
ऐसे बिछुड़े गे दोबारा मिलना मुश्किल,
मिलेगे कैसे मिलने का न बहाना होगा।
भटके यहाँ गर वहां तुझे चैन की हसरत,
"रैना"फिर तो उससे दिल लगाना होगा। राजेन्द्र शर्मा रैना"

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