इक तू मेरा दुनिया बेगानी है,
तू सच्चा बाकी झूठी कहानी है।
ये तो तेरी मरजी तू रखे जैसे,
नाम तेरे कर दी जिन्दगानी है।
और किसी को क्या छोड़े गा,
इन्सां खुद से करे बेईमानी है।
ऐसा बिछुड़ा फिर मिलता नही,
याद में आँखों से टपके पानी है।
बैठ कर कभी तेरे क़दमों में,
अपनी कहानी तुझे सुनानी है।
मुफलिस "रैना"पे रहम करदे,
तेरी इक झलक मैंने पानी है। राजेन्द्र शर्मा "रैना"
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