Saturday, October 12, 2013

il lgane ka bhana

देश प्रेमियों के लिए

अपना बुरा भला सोच कर हमें अब सम्भलना चाहिये,
टूटी सड़कें चीख चीख कहती मसीहा बदलना चाहिये।
शमा के साथ गर जल रहा है परवाना ये उसकी मजबूरी,
हमारी तो कोई ऐसी मजबूरी नही हमें न जलना चाहिये।
भारत देश अब असहाय बेहिम्मत मजबूर सा लगता है,
बेहतर ये हर दिल में हिम्मत का बच्चा पलना चाहिये।
भ्रष्टाचारी गद्दार दगेबाज नेताओं ने देश गिरवी धर दिया,
अब जनता को ऐसे गद्दारों का इंतजाम करना चाहिये।
अंग्रेजो के पीठू अपनी गन्दी आदत बदल नही सकते,
रैना"काले अंग्रेजों के खिलाफ सड़कों पे उतरना चाहिये। राजेन्द्र शर्मा "रैना"

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