दोस्तों के लिए खास पेशकश
हम किस्मत के सताये हैं ,
गम सीने से लगाये हैं।
जो कल तक थे मिरे अपने,
अब बेगाने पराये हैं।
जो लखते जिगर थे मेरे,
वो फिर वापिस न आये हैं।
उसको तो फल मिले अक्सर,
पौधे जिसने लगाये हैं।
कांटे से क्यों गिला शिकवा,
गुल से जब जख्म खाये हैं।
क्यों उनकी याद फिर आई,
कल ही तो खत जलाये हैं।
रैना"कब के फना होते,
हिम्मत ने ही बचाये हैं। राजेन्द्र रैना गुमनाम
हम किस्मत के सताये हैं ,
गम सीने से लगाये हैं।
जो कल तक थे मिरे अपने,
अब बेगाने पराये हैं।
जो लखते जिगर थे मेरे,
वो फिर वापिस न आये हैं।
उसको तो फल मिले अक्सर,
पौधे जिसने लगाये हैं।
कांटे से क्यों गिला शिकवा,
गुल से जब जख्म खाये हैं।
क्यों उनकी याद फिर आई,
कल ही तो खत जलाये हैं।
रैना"कब के फना होते,
हिम्मत ने ही बचाये हैं। राजेन्द्र रैना गुमनाम
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