माँ तो बहारों की हवा जैसी,
माँ तो इबादत है दुआ जैसी।
हर रोग का उपचार माँ करती,
ममता नयामत है दवा जैसी।
माँ खैर हरपल मांगती रहती,
माँ की मुहब्बत है वफ़ा जैसी।
कोई नही है इस जहाँ में माँ
कुरबान हो
माँ तो इबादत है दुआ जैसी।
हर रोग का उपचार माँ करती,
ममता नयामत है दवा जैसी।
माँ खैर हरपल मांगती रहती,
माँ की मुहब्बत है वफ़ा जैसी।
कोई नही है इस जहाँ में माँ
कुरबान हो
No comments:
Post a Comment